Posts

Showing posts from January, 2026

खग ही जाने खग की भाषा

खग ही जाने खग की भाषा प्रेम करने वाला ही जाने प्रेम क्या है  मुझे तुमसे या तुमसे पहले भी कइयों से जुड़ाव रहा लगाव रहा तुम्हारे बाद भी है और ऐसा नहीं कि आकर्षण होना बंद हो गया है।  मार्ग है यह होता ही है।  हाँ पर अब बचपना नहीं है, खुद तक सीमित है और सबसे जरूरी क़ि तुम एक मानक रेखा सी हो पीछे एक रबड़ से पेंसिल जैसा सब मिट जाता है पर यह ख्वाब की रेखा जैसे पहली दफा गहरे रंग से रंग दिया गया हो न तो मिटता है और न दबता है। एक और रंग जो तुमसे पीछे भी उभरता है शायद वो तुमसे छुपा भी नहीं है। बहरहाल जियो जी भर कर बस खुद को पहले नहीं बताया अब बताना, महीने के जड़-टुक्के में खबर लिख भेजना। खूब प्रेम करना, प्रेम देना परिवेश खुशनुमा करना।

मोहोब्बत

इश्क़ भला कैसे दोतरफा होता है,   इश्क़ की दोषी होती है निगाहें, निगाहें होती है केवल एक तरफ़ा,              सीधी और सामने। फर्क जज्बातों का है हालातों का है, मैं उस जैसा नहीं फेर सकता कलम बस इतना है कि मेरे परिवेश में निर्णय की परवरिश नहीं हुई जिसका मैं भोगी हूँ।