मोहोब्बत

इश्क़ भला कैसे दोतरफा होता है,
  इश्क़ की दोषी होती है निगाहें,

निगाहें होती है केवल एक तरफ़ा, 
            सीधी और सामने।

फर्क जज्बातों का है हालातों का है,
मैं उस जैसा नहीं फेर सकता कलम

बस इतना है कि मेरे परिवेश में निर्णय की परवरिश नहीं हुई जिसका मैं भोगी हूँ।

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