खाली दुपहरी...
मैं, मेरा अतीत और अब भविष्य सोचता हूँ कैसा होगा...? अतीत में असीम दर्द था छोटी सी कल्पनाओं में मिलने वाली खुशी, डर के साये में बीतने वाले बरस, छोड़ो मेरे बच्चों, तुम बड़े होओगे, मैं पग-पग में साथ रहूँगा, तुम्हें प्रेम करूँगा, साथ ले जाऊँगा आगे बढ़ी दुनिया के साये में, डाठूँगा, फ़टकारूँगा, गले लगाऊंगा नित आज की तरह। पर बच्चों सोचता हूँ, मैं न रहा तो क्या करोगे तुम.?