वंशावली
विगत वर्ष मैंने प्रयास किया कि हमारी वंशावली बनाई जाय। जिससे कि ग्रामीण परिवेश में भूले जा चुके रिश्ते पुनर्जीवित हो सकें और इसके लिए बड़े भाई साहब की बनाई हुई वंशावली पर संशोधन करना था। मैंने विचार किया कि इसमें हमारी चेली-बेटियों का नाम भी सम्मलित किया जाना चाहिए ताकि हमारी भावी पीढ़ियाँ खून के रिश्ते को समझ सकें और फिर वैवाहिक सम्बन्धों में दूरी बना सके। दरअसल ऐसा करने के पीछे कारण था कि हमारे बगल में एक गाँव है जहाँ बहुत पुराने समय से इंटर कॉलेज है और पड़ोस उसके अड़ोस-पड़ोस के गाँव के बच्चे वहीं पढ़ने जाते हैं। ऐसे ही किसी कक्षा में पढ़ने वाले दो बच्चे मिलते हैं और प्रेम हो जाता है। उनके परिवारों का आपस में कोई रिश्ता न था तो प्रेम परवान चढ़ा और फिर लड़का सेना में भर्ती हो गया। तब इसने छुट्टी में आकर जैसा कि हमारे यहाँ प्रचलित है भगाकर विवाह कर लिया जो कि सामाजिक वैद्यता के साथ होता ही है। शादी हुई तो मालूम पड़ा कि उन दोनों की माताएं तो सगी ममेरी-फुफेरी बहनें हैं। अब क्या होता जब चिड़ियां चुग गई।खेत। दरअसल हमारी पड़ोस की एक दीदी का विवाह 1 गाँव छोड़कर तीसरे गाँव में हुआ था और उसकी मामा की बेटी ...