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बातें आधी, रातें आधी, जमीं आधी, ये नमी आधी, इश्क़ आधा, रश्क आधा, सफर आधा, जफर आधा, साथ आधा, नांद आधा,   पूनम का देखो ये चांद आधा।
बंटा हुआ हूँ, मेरे है कई हिस्से यहाँ, कुछ दफन हो गए दरख़्त की शाख में,  कई चल रहे हैं किस्से यहाँ।
न मेरे आँसू, न मेरी आवाज, कौन देखें, कौन सुने आज। 2012 ¿ 2023

सन्देश

क्या ये हवाएँ डाक नहीं लाती? सुनो! सन्देश भेजा था तुम्हारे नाम  कई बार पहले, पूछना था, कहां हो तुम, कैसे हो? कुछेक बातें थी करने को, कुछ बीता समय रोने को। जवाब न आया, न ख्वाबों के शहर में कुछ रोनक दिखी, न कलम ने लहू ही उगला अबकी। सोचता हूँ चिंता हो कोई  या खबर होगी कोई अच्छी।

प्रेम

प्रेम  सहजता है, प्रेम सरलता है, प्रेम निश्छलता है, प्रेम सुंदरता है, प्रेम सरसता है, प्रेम आकर्षण है, प्रेम समर्पण है, प्रेम श्रद्धा है, प्रेम अंधा है, प्रेम प्राच्य है, प्रेम सुपाच्य है, प्रेम  अनुभूति है, प्रेम अभिभूति है, प्रेम कलंदर है, प्रेम बंदर है, प्रेम बाहर है, प्रेम अंदर है, प्रेम लॉंछनीय, प्रेम वांछनीय, प्रेम चुनौती, प्रेम कटौती, प्रेम अंधियारा, प्रेम उजियारा, प्रेम तुम सा है, प्रेम हम सा है।
अक्सर रोने की बातें बस स्त्री के हित में कही गई, लिखी गई और व्याख्या की गई। पर सच तो ये है कि मरद भी रोता है, हालात न हों काबू में जब, बनाकर न बनने लगे तब, ढूंढ एक संजीदा एकांत किनारा मरद भी रोता है, हाँ मरद भी रोता है। जब पिता गैर नियत निकले, माता भाव हीन निकले पुत्र नालायक निकले, पुत्री निर्लज्ज निकले, पत्नी कुलटा निकले, भाई कसाई निकले, बहन सूर्पनखा बन जाये, समाज दानवी हो जाये, अपने नोंच खाने लगे, तब  एक मरद रोता है मरद के आँसू नहीं दिखते अक्सर पर जब रोता है तो बाढ़ आ जाती है, कई बस्तियां समा जाती है उसमें।
सुबह से शाम हो जाती, न बबा न मम्मी नजर आती, कुछ इस तरह बीत रहा बचपन मेरा, साँझ मैं घर इनको पाऊँ, बस नींद में ही सहर हो जाती।