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वक्त कब बदलता है

सूरज उगे या डूबे हमे क्या हमें तो अपने प्रकाश से उजाला बिखेरना है मंज़िल दूर हो या पास हमें क्या हमें तो बस चलना है वक्त कब बदलता है बदलना तो हमें है शाम नही बदलती सुबह फिर वही ...

बूढ़ा गया अपना पहाड़

ये क्या! कहाँ खो गयी हरियाली मैं केवल यही देख सका इतने बरस तो हुए नहीं बूढ़ा गया अपना पहाड़ सच में हरे-भरे जंगलों से भरा था आज बूबू के सिर जैसा टकला अपना पहाड़ सुरक्षा के लिए, सुवि...

जीवन

जीवन लग जाता है जीवन बनाने में एक जीवन है कि उसका कोई हिसाब नहीं है।               ए जीवन चल कि मिल के बात करें आज             एक रास्ता मैं बनाता हूँ एक रास्ता तू भी बना         ...

माँ

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ये दिन ये वक्त बिल्कुल वही है हूबहू वही है यूँ तो रात भर सोया मैं भी ना था   आँखे पथराई थी मेरी हाँ लोग कहते भी है जाने वालों के लिए कौन रोता है पर  याद तो है मुझे माँ पापा की गोद म...
आज के समय में पहाड़ के गांव जिस तरह ख़ाली हो रहे हैं उस दशा में पहाड़ की दशा देखें किस तरह रो रहा हैं पहाड़ । अरे विकास के ठेकेदारों पलायन की गति तो देखो विकास तुम्हारा कहाँ गया? रो...

बहुत मज़ेदार है ये हार।

कभी क्रोध भर जाता है तो कभी ढूंढने लगते प्यार कभी चलना भी दूबर होता कभी दौड़ने लगती कार अन्य विकल्पों को गर सोचें तो हैं बहुत मज़ेदार ये हार अहम् भाव को तोड़ती है सही राह में मो...

क्या

ओ समाज-समाज रोने वालों कभी समाज को देखा है क्या आधी थालियां फेंकने वालों भूखे की आँखे देखि है क्या बड़ी-बड़ी फेंकने वालों कभी किसी गरीब का हाथ थामा है क्या पैसे की भूख में मरने ...