जस असौजक काम आईजां, कबे-कबार तेरी उसी फाम आईजां। आफतकी बख्त जस मुखमे राम आईजां, मेर मुखमे तेर नाम आईजां.
Posts
साला दोस्त-2
- Get link
- X
- Other Apps
दिन बीते, महीने बीते और फिर साल बीते, मैं सोचता हूँ! कि क्या जोड़े रखा हमें इतने समय जबकि मैं साधारण सा बस डरपोक सा और वो हर नई जगह सर्वाइव और शासन करने का साहस रखने वाला व्यक्ति कितने विपरीत हैं हम। मेरे कई सारे राजों को सीने में दफन करने वाला वो शख्स सच में हक़ योगी सा लगता है। पीछे मुड़ता हूँ तो कभी-कभी मुझे लगता है जैसे वो गोद लिया गया हो उसके माँ-बाप कहीं सौतेले न हों। (आश्चर्य एक बार तो पूछ भी लिया था मैंने) ये ख्याल अक्सर तब आता है जब उसका विचार और संघर्ष जो शायद नहीं होने थे साफ-साफ दूर से ही दिखने लगते हैं। बारहवीं करने के बाद कोई बड़ा तो नहीं हो जाता पर मुझे लगता है वो हो गया था। उसकी जिद थी या उसका एकहड़ियापन था कि उसने बस इसी को सार बना लिया था ये उसका बल था कि निर्बलता इस पर मैंने कभी विचार नहीं किया। बारहवीं के बाद उसने अपने हाथों में अपनी जिम्मेदारी ले ली थी जो उसके लिए कब ताकत से कमज़ोरी बन गई कोई जवाब नहीं है इसका। बात शुरुआती मुलाकात से बहुत आगे निकल गई थी मैं अक्सर चर्चाओं में अपनी बातें रख देता था पर उसने कभी अपने बारे में अधिक विस्तार से विवरण पेश नहीं किया। बादलों से घि...