सुबह-सुबह
जेहनी सुकूँ मिले,
चलो छेड़ो ऐसे राग को,
ये नया कारोबार है,
जरा यूँ सम्भालो,
जैसे सुहागन सुहाग को,
हरियाली है बहुत,
दुरस्त रखो दिमाग को,
ये नई पौध है, यूँ न बिगाड़ो,
जैसे दूब उजाड़ती है बाग को।
सुंदर बगिया बनाई है पूर्वसूरियों ने पर,
जमाने की सोची थी तोड़ दी देखो,
पुष्पराज ने नई कपोलों की धाग को।
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