धरती
सुना तुम धरती बन गई हो,
सुनो! खूब उर्वर होना,
सूरज की चमक बिखेरना,
नित नए आयाम उगाना,
सींचना पानी देना।
नए पुष्प ले आना, कांटे भी सजाना,
सुनहरे मोती रखना सर माथे पर,
इतिहास के पत्थरों को भी जिलाना,
बदरा जो पड़ जाएं मायूस न होना,
बरसात में भीगना और उर्वर हो जाना।
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