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ए चल कि नया साल मनाएं

खुशियों की और चले दुःख की यादों को जलाएं ए चल कि नया साल मनाएं सफर-ए-नए साल चलें बुराई की होली जलाएं ए चल कि नया साल मनाएं दिन गए साल गए दोस्त आये दोस्त गए ए चल कि नए दोस्त बनाएं ...

तलाश

न दूर हैं ना पास हैं पल-पल जिसका एहसास हैं न जाने क्या हैं वो जिसकी हमें तलाश हैं बेकार लगता हैं सोचना कभी पर कभी लगता कुछ खास हैं क्या हैं न जाने वो बहुत कुछ खोने के बाद भी जिसक...

दर्दे दिल बयाँ न करना

दिल के दर्द को बयान न करना दुनिया की तो आदत हैं दया ना करना दर्द-ए-दिल सुनते हैं बड़े गौर से हँसते भी हैं पीछे जोर से दर्द बाँटने की चाहत कभी ना रखना पर बांध के पोटली सभी ना रखना भ...

मुजरिम व समाज

रूखी-सुखी खाता था                 पेट पकड़ के रोता था। फुटपाथ से उठाता था                 भूख लगे तो रोता था। तन ढकने को कपड़ा था                  पेट भरना लक्ष्य था। भीख माँगना ...

कौन कहता हैं सपने नहीं टूटते

कौन कहता हैं सपने नहीं टूटते सपने उनके टूटते हैं जो सपनो में सपना ढूंढते हैं सपना वो साकार होता हैं जो जागती आँखों में होता हैं जो देखता हैं सोकर सपने वो अपनी किस्मत में रोत...

सुख-दुःख

पक्षियों की चहचहाहट में भौरों की गुनगुनाहट में मुझे जीवन का खालीपन नज़र आता हैं। पत्तों की सरसराहट में पशुओं की फुसफुसाहट में मुझे जीवन का सूनापन नज़र आता हैं। सूरज की गरम...

जाने क्यों

जानें क्यों ये नदी निरन्तर बहती हैं क्यों हवा भी चलती रहती हैं पर ये कलम क्यों नहीं रोज़ चलती हैं क्यों सूरज गर्मी देता हैं क्यों जीवन सदा रुलाता हैं क्यों घड़ी निरंतर चलती ह...