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14 अगस्त 2009 को लिखी गयी पंकियां

पक्षियों की चहचहाहट में, भौरों की गुनगुनाहट में, मुझे जीवन का खालीपन नज़र आता हैं। पत्तो की सरसराहट में, पशुओं की फुसफुसाहट में, मुझे जीवन का सूनापन नज़र आता हैं। सूरज की गरमा...

दिल के दर्द को बयां न करना

दिल के दर्द को बयां न करना दुनिया की तो आदत हैं दया न करना दर्द-ए-दिल सुनते हैं बड़े गौर से हँसते भी हैं पीछे बहुत जोर से दर्द बाँटने की चाहत कभी न रखना पर बांध के पोटली सभी न रखना ...

तो कहूँ....।

पर पैरों से मन्ज़िल पाई तो क्या ? अपने पैरों में खड़े होके दिखाओ तो कहूँ! बने पथ पर दौड़े तो क्या अपनी राह बनाओ तो कहूँ सफल बनके हँसे तो क्या असफल होक मुस्कराओ तो फिर कहूँ अर्जुन ब...

परेशान ना हो

रात तो होनी ही हैं, परेशान मत हो काँटों को देखके हैरान मत हो रात न होती तो दिया ना जलता काँटे न होते तो फूल ना खिलता दुःख समझकर मत गवां इस पल को यही तो जीवन का एहसास हैं असफलता तो...

ए चल कि नया साल मनाएं

खुशियों की और चले दुःख की यादों को जलाएं ए चल कि नया साल मनाएं सफर-ए-नए साल चलें बुराई की होली जलाएं ए चल कि नया साल मनाएं दिन गए साल गए दोस्त आये दोस्त गए ए चल कि नए दोस्त बनाएं ...

तलाश

न दूर हैं ना पास हैं पल-पल जिसका एहसास हैं न जाने क्या हैं वो जिसकी हमें तलाश हैं बेकार लगता हैं सोचना कभी पर कभी लगता कुछ खास हैं क्या हैं न जाने वो बहुत कुछ खोने के बाद भी जिसक...

दर्दे दिल बयाँ न करना

दिल के दर्द को बयान न करना दुनिया की तो आदत हैं दया ना करना दर्द-ए-दिल सुनते हैं बड़े गौर से हँसते भी हैं पीछे जोर से दर्द बाँटने की चाहत कभी ना रखना पर बांध के पोटली सभी ना रखना भ...