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बिन इजा के

घर से बहुत दूर हो गया बिन इजा के कुमार से मज़दूर हो गया बिन इजा के तन्हा मगर सारथी हो गया बिन इजा के मय का साथी हो गया बिन इजा के बिना दिये का बाती हो गया बिन इजा के मेरे जज्बातों क...

कुछ ऐसे ही

तोड़ दी डोर मैंने इंसानियत की फिर से, उठ चुका विश्वास किसी का फिर मुझ पर से, फिर बोल उठा आज मैं अपने मन से, कि मत जला आशाओं के दीप, बुझ जायेंगे ये आँसू रूपी जल से, मत बनना सहारा मेरा ...

पशोपेश

अजीब सी पशोपेश है ज़िन्दगी सच नज़र नहीं आता झूठ समझ नहीं आता मैं तेरे साथ तो हूँ पर तू दिल में ही आता है जुबाँ पे नहीं आता तेरे जैसा सितमगार नहीं कि यूँही याद आके मुड़ जाऊँ मैं तो ...

वक्त कब बदलता है

सूरज उगे या डूबे हमे क्या हमें तो अपने प्रकाश से उजाला बिखेरना है मंज़िल दूर हो या पास हमें क्या हमें तो बस चलना है वक्त कब बदलता है बदलना तो हमें है शाम नही बदलती सुबह फिर वही ...

बूढ़ा गया अपना पहाड़

ये क्या! कहाँ खो गयी हरियाली मैं केवल यही देख सका इतने बरस तो हुए नहीं बूढ़ा गया अपना पहाड़ सच में हरे-भरे जंगलों से भरा था आज बूबू के सिर जैसा टकला अपना पहाड़ सुरक्षा के लिए, सुवि...

जीवन

जीवन लग जाता है जीवन बनाने में एक जीवन है कि उसका कोई हिसाब नहीं है।               ए जीवन चल कि मिल के बात करें आज             एक रास्ता मैं बनाता हूँ एक रास्ता तू भी बना         ...

माँ

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ये दिन ये वक्त बिल्कुल वही है हूबहू वही है यूँ तो रात भर सोया मैं भी ना था   आँखे पथराई थी मेरी हाँ लोग कहते भी है जाने वालों के लिए कौन रोता है पर  याद तो है मुझे माँ पापा की गोद म...